
सर्दियों के मौसम में राजा कृष्णदेवराय शिकार पर जाने का निश्चय करते हैं। वे तेनाली रामन को भी अपने साथ चलने का निमंत्रण देते हैं। कुछ दरबारी मन ही मन सोचते हैं कि तेनाली अब उम्रदराज़ हैं और इस रोमांचक शिकार के लिए उपयुक्त नहीं होंगे।
शिकार के दौरान राजा एक हिरण का पीछा करते-करते घने झाड़ियों की ओर बढ़ने लगते हैं। तभी तेनाली रामन अचानक राजा को रोक लेते हैं। सभी हैरान हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें वहाँ कोई खतरा दिखाई नहीं देता।
तेनाली ध्यान से झाड़ियों को देखकर बताते हैं कि वहाँ आगे एक गहरा गड्ढा है, जो पत्तों और झाड़ियों से ढका हुआ है। अगर राजा आगे बढ़ते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। तेनाली की सूझ-बूझ से राजा समय रहते रुक जाते हैं और सुरक्षित बच जाते हैं।
राजा कृष्णदेवराय को समझ आता है कि ताकत या उम्र से बढ़कर समझदारी और दूरदर्शिता होती है। वे तेनाली रामन की प्रशंसा करते हैं और दरबारियों को भी सीख मिलती है।
यह चतुर कहानी बच्चों को सिखाती है कि आगे सोचकर निर्णय लेना, सावधानी बरतना और अनुभव की कद्र करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि सच्ची बुद्धिमानी मुश्किल परिस्थितियों में ही काम आती है।