विजयनगर का रामया और तेनाली रामन

विजयनगर के राज्य में एक अफ़वाह फैल गई थी कि अगर लोग सुबह रामया को देखें तो उनका दिन खराब होगा और वे अपना भोजन भी नहीं कर पाएंगे। लोग डर के मारे रामया से दूर रहते थे और उसे दोषी मानने लगे।
राजा कृष्णदेवराय इस बात की जांच करना चाहते थे। उन्होंने खुद रामया को सुबह देखा और अफ़वाह सही लगने लगी। राजा को गुस्सा आया और उन्होंने रामया को सजा देने का सोचा।
तभी तेनाली रामन ने अपनी चतुराई दिखाई। उन्होंने राजा को समझाया कि यह अफ़वाह केवल अंधविश्वास है और किसी को बिना सबूत के दंडित करना न्यायसंगत नहीं है। तेनाली रामन ने ऐसा उपाय सुझाया कि सबकी आंखें खुल गईं और राजा को सच का पता चला।
रामया की सुरक्षा हो गई और अफ़वाह का सच सबके सामने आया।
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि निर्णय लेने से पहले सोच-विचार करना चाहिए, निष्पक्ष रहना चाहिए और बिना प्रमाण के किसी पर दोषारोपण नहीं करना चाहिए।









