
राजा कृष्णदेवराय ने दरबार में एक चुनौती रखी—कहना कि राज्य में सबसे बड़ा मूर्ख कौन है। सभी दरबारियों ने अपनी राय दी और अपने-अपने जवाबों में मशगूल हो गए।
तभी तेनाली रामन सभी को चौंका देते हैं। वे राजा की तरफ देखकर कहते हैं, “महाराज, सबसे बड़ा मूर्ख सूची में आप भी हैं।” दरबार में सब लोग हक्का-बक्का रह जाते हैं।
राजा पहले गुस्से में आते हैं, लेकिन फिर तेनाली रामन समझाते हैं कि यह मज़ाक नहीं, बल्कि एक बुद्धिमान सीख है। उन्होंने यह दिखाया कि अगर हम बिना सोच-समझे निर्णय लेते हैं या केवल अपनी राय पर भरोसा करते हैं, तो वही असली मूर्खता है।
यह मज़ेदार और चतुर कहानी बच्चों को सिखाती है कि निर्णय लेने से पहले सोचना ज़रूरी है और कभी-कभी ह्यूमर का इस्तेमाल करके भी ज्ञान साझा किया जा सकता है।