
छोटा दीया में, दीपां—एक छोटी सी टूटी हुई दीया—खुद को बेकार महसूस करती है क्योंकि बड़ी दीये उसका मज़ाक उड़ाते हैं। दिवाली के समय उसे पीछे छोड़ दिया जाता है और वह डर जाती है कि वह कभी चमक नहीं पाएगी। लेकिन जब एक तेज़ हवा सभी दीयों को बुझा देती है, तो क्या दीपां को अपनी क़ीमत साबित करने का मौका मिलेगा? यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि हर किसी का अपना महत्व होता है, चाहे वह कितना ही छोटा या अपूर्ण क्यों न महसूस करे।