

नाटक में नाटक कक्षा 8 हिंदी की एनसीईआरटी दुर्वा भाग–3 पुस्तक में संकलित मंगल सक्सेना की मनोरंजक नाट्य-कथा है। इस पाठ में कुछ बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले एक नाटक की तैयारी, रिहर्सल और मंचन के दौरान घटित हास्यपूर्ण घटनाओं का चित्रण किया गया है। अभिनय के समय कलाकारों की घबराहट, संवाद भूल जाना, आपसी नोकझोंक तथा निर्देशक की सूझबूझ के माध्यम से लेखक ने रंगमंच की वास्तविक चुनौतियों को रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। अंत में यह स्पष्ट होता है कि दर्शकों ने जिस अव्यवस्था को वास्तविक समझा, वह स्वयं नाटक का ही एक हिस्सा थी।
इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी टीमवर्क, आत्मविश्वास, अनुशासन, अभ्यास (रिहर्सल) के महत्व, नेतृत्व क्षमता तथा कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ से निर्णय लेने की सीख प्राप्त करते हैं। यह नाटक संदेश देता है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि तैयारी, सहयोग, धैर्य और सकारात्मक सोच से मिलती है। साथ ही यह सिखाता है कि अपनी गलतियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारना ही सच्चे कलाकार की पहचान है।
यह पाठ विद्यार्थियों में पठन कौशल, संवाद-कौशल, अभिनय-बोध, रचनात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता, सहयोग की भावना तथा साहित्यिक संवेदनशीलता का विकास करता है। साथ ही यह हिंदी नाटक साहित्य की विशेषताओं से परिचित कराते हुए कक्षा 8 हिंदी, एनसीईआरटी तथा विद्यालयी परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी में सहायता करता है।