

इस जल प्रलय में कक्षा 9 हिंदी की एनसीईआरटी कृतिका भाग–1 पुस्तक में संकलित फणीश्वरनाथ रेणु का सशक्त संस्मरण है। इसमें लेखक ने बाढ़ की विभीषिका, मानव जीवन पर उसके प्रभाव तथा संकट की घड़ी में लोगों के अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं का यथार्थ एवं जीवंत चित्रण किया है।
इस अध्याय में विद्यार्थी प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ के कारण होने वाली समस्याओं, सामाजिक व्यवहार, मानवीय सहयोग तथा विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और साहस के महत्व को समझते हैं। लेखक ने अपने अनुभवों के माध्यम से यह बताया है कि आपदा केवल विनाश ही नहीं लाती, बल्कि मानवता, सहानुभूति और सामूहिक सहयोग की भावना को भी उजागर करती है।
यह पाठ विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनशीलता, आपदा जागरूकता, पर्यावरण चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और समस्या-समाधान कौशल का विकास करता है। साथ ही यह हिंदी भाषा, गद्य-बोध और साहित्यिक समझ को समृद्ध बनाते हुए विद्यार्थियों को कक्षा 9 हिंदी, एनसीईआरटी तथा विद्यालयी परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी में सहायता करता है।