
रामू एक गरीब आदमी था। एक दिन वह एक प्राचीन और जादुई बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर ईश्वर से प्रार्थना करता है। उसकी सच्ची प्रार्थना से प्रसन्न होकर उसे वहाँ सोने से भरा एक घड़ा मिल जाता है। रामू बहुत खुश होता है और कृतज्ञ मन से घर लौट जाता है।
लेकिन कुछ समय बाद उसके मन में लालच आ जाता है। वह और अधिक धन पाने की इच्छा से फिर उसी पेड़ के पास लौटता है। इस बार उसकी लालच उसे मुसीबत में डाल देती है और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
तब रामू को समझ आता है कि संतोष और कृतज्ञता ही सच्चे सुख का आधार हैं, और लालच हमेशा विनाश का कारण बनता है। यह कहानी बच्चों को आभार व्यक्त करने और लालच से दूर रहने की सीख देती है।