
एक बुद्धिमान लेकिन घमंडी छात्र अर्जुन अपने गुरु से बार-बार कठिन प्रश्न पूछकर उनकी परीक्षा लेने की कोशिश करता रहता है। उसे अपनी बुद्धि पर बहुत गर्व होता है। उसकी घमंड को दूर करने और विनम्रता का महत्व समझाने के लिए गुरु वशिष्ठ उसे एक कहानी सुनाते हैं।
वे एक ऐसे राजा की कहानी बताते हैं जो एक ऐसे घड़े को भरने की कोशिश करता है, जिसमें नीचे छेद होता है। राजा चाहे जितना भी पानी डालता है, घड़ा कभी नहीं भरता। तब उसे समझ आता है कि जब तक घड़े का छेद बंद नहीं होगा, वह कभी पूरा नहीं हो सकता।
यह कहानी सुनकर अर्जुन को एहसास होता है कि यदि मन में घमंड और अहंकार का “छेद” हो, तो ज्ञान भी टिक नहीं पाता। उसे समझ आता है कि सच्चा ज्ञान विनम्रता से ही प्राप्त होता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि सीखने के लिए नम्र होना बहुत जरूरी है।