अंधा राजा और जादूगर
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अंधा राजा और जादूगर

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राजा वीरेंद्र जन्म से अंधे थे, फिर भी वे अपनी बुद्धि और समझदारी के कारण एक महान और न्यायप्रिय शासक माने जाते थे। एक दिन एक चालाक जादूगर दरबार में आता है और राजा से वादा करता है कि वह एक भारी कीमत के बदले उनकी दृष्टि लौटा सकता है।
जादूगर की बातों में मिठास और दिखावा था, लेकिन राजा वीरेंद्र केवल आँखों से नहीं, बल्कि अपने विवेक से देखने वाले थे। उन्होंने जादूगर की बातों को ध्यान से परखा और उसके वचनों में छिपे छल को समझ लिया। अंततः राजा ने उसकी चाल को उजागर कर दिया और उसे दरबार से निकाल दिया।
राजा वीरेंद्र ने सबको सिखाया कि सच्ची दृष्टि आँखों से नहीं, बल्कि बुद्धि और समझ से आती है। यह कहानी बच्चों को विवेक, समझदारी और सही-गलत पहचानने का महत्व सिखाती है।









