
फ़र्श पर

फ़र्श पर कक्षा 8 हिंदी की एनसीईआरटी दुर्वा भाग–3 में संकलित निर्मला गर्ग की संवेदनशील कविता है। इस कविता में कवयित्री घर के फ़र्श पर घटने वाली छोटी-छोटी दैनिक गतिविधियों के माध्यम से जीवन की गहरी सच्चाइयों को प्रस्तुत करती हैं। चिड़िया, हवा, सूरज, बच्चे, परिवार के सदस्य और अंत में घर की सफाई करने वाली महरी के कार्यों का सहज चित्रण करते हुए कविता श्रम के महत्व, मानवीय संवेदनाओं और साधारण जीवन की असाधारण सुंदरता को उजागर करती है।
इस कविता के माध्यम से विद्यार्थी यह समझते हैं कि घर के हर छोटे-बड़े कार्य का अपना महत्व होता है और प्रत्येक व्यक्ति का श्रम सम्मान के योग्य है। विशेष रूप से महरी के परिश्रम को कवयित्री ने एक कविता की तरह सुंदर और अर्थपूर्ण बताया है, जिससे श्रम की गरिमा, समानता और दूसरों के कार्य के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है। कविता दैनिक जीवन के सामान्य दृश्यों में छिपे मानवीय मूल्यों को पहचानने की प्रेरणा देती है।
यह पाठ विद्यार्थियों में पठन कौशल, काव्य-बोध, अवलोकन क्षमता, सामाजिक जागरूकता, सहानुभूति, संवेदनशीलता, रचनात्मक चिंतन, भाषा-कौशल, नैतिक मूल्यों तथा श्रम के प्रति सम्मान का विकास करता है। साथ ही यह हिंदी कविता साहित्य की विशेषताओं से परिचित कराते हुए कक्षा 8 हिंदी, एनसीईआरटी तथा विद्यालयी परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी में सहायता करता है।