

बूढ़ी अम्मा की बात कक्षा 8 हिंदी की एनसीईआरटी दुर्वा भाग–3 में संकलित एक प्रेरणादायक लोककथा है। इस कहानी में किसान गोमा लगातार सूखे और कठिन परिस्थितियों से निराश हो जाता है, लेकिन एक बुद्धिमान बूढ़ी अम्मा उसे धैर्य, आशा और अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा देती हैं। वे समझाती हैं कि मनुष्य का काम मेहनत करना है, जबकि प्रकृति अपना कार्य समय आने पर स्वयं करती है। कहानी परिश्रम, सकारात्मक सोच और प्रकृति पर विश्वास का सुंदर संदेश देती है।
इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने, समय पर अपने कर्तव्य का पालन करने तथा प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को समझते हैं। कहानी यह भी बताती है कि वृक्षों का संरक्षण वर्षा और पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है। बूढ़ी अम्मा के अनुभवपूर्ण शब्द गोमा को निराशा से बाहर निकालते हैं और उसे फिर से पूरे उत्साह के साथ अपने खेत तैयार करने की प्रेरणा देते हैं।
यह पाठ विद्यार्थियों में पठन कौशल, नैतिक मूल्यों, धैर्य, समस्या-समाधान क्षमता, पर्यावरण जागरूकता, निर्णय लेने की क्षमता, सकारात्मक सोच, भाषा-कौशल, तार्किक चिंतन तथा कर्तव्यनिष्ठा का विकास करता है। साथ ही यह हिंदी लोककथा साहित्य की विशेषताओं से परिचित कराते हुए कक्षा 8 हिंदी, एनसीईआरटी तथा विद्यालयी परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी में सहायता करता है।