
जंगल में एक दिन सभी जानवर इकट्ठा हुए। उन्हें अपना नया राजा चुनना था।
शेर गर्जना करते हुए बोला,
“मैं सबसे ताकतवर हूँ। मेरी दहाड़ से पूरा जंगल काँपता है, इसलिए राजा मुझे ही बनना चाहिए।”
कुछ जानवर डर के मारे चुप रहे, लेकिन चालाक लोमड़ी आगे आई और बोली,
“राजा केवल ताकतवर ही नहीं, दयालु और सबकी मदद करने वाला भी होना चाहिए। जो सबका ख्याल रखे, वही सच्चा राजा होता है।”
तभी हाथी धीरे से आगे बढ़ा। उसने कहा,
“मैं राजा बनने नहीं आया हूँ, लेकिन अगर कभी किसी को मेरी ज़रूरत होगी, तो मैं हमेशा मदद करूँगा।”
तभी एक नन्हा खरगोश बोला,
“जब बाढ़ आई थी, तब हाथी ने हमें अपनी पीठ पर बैठाकर सुरक्षित जगह पहुँचाया था।”
एक हिरण बोला,
“सूखे के समय हाथी ने हमें पानी का रास्ता दिखाया था।”
सभी जानवरों को याद आया कि हाथी हमेशा बिना किसी स्वार्थ के सबकी मदद करता रहा है।
तभी सबने एक आवाज़ में कहा,
“हमारा राजा वही होना चाहिए जो सबकी भलाई सोचे।”
इस तरह जंगल का राजा निस्वार्थ हाथी बना। उसने कभी किसी पर रौब नहीं जमाया, बल्कि सबके साथ प्रेम और न्याय से शासन किया।
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि सच्चा नेतृत्व ताकत से नहीं, बल्कि दया, जिम्मेदारी और दूसरों की मदद करने की भावना से बनता है।