
एक व्यापारी के पास एक मेहनती गधा और एक घमंडी घोड़ा था।
व्यापारी हमेशा गधे पर भारी बोझ लाद देता, जबकि घोड़ा हल्का सामान लेकर आराम से चलता रहता।
रोज़-रोज़ भारी बोझ उठाते-उठाते गधा थक गया। एक दिन उसने घोड़े से विनम्रता से कहा,
“मित्र, आज मैं बहुत थक गया हूँ। क्या तुम मेरे बोझ का थोड़ा सा हिस्सा उठा लोगे?”
घोड़े ने घमंड से नाक चढ़ाकर कहा,
“मैं क्यों उठाऊँ? यह तुम्हारा काम है, मेरा नहीं।”
गधा चुपचाप चलता रहा, लेकिन कुछ दूर जाने के बाद वह थकान के कारण रास्ते में ही गिर पड़ा।
अब व्यापारी को मजबूर होकर गधे का पूरा बोझ घोड़े पर लादना पड़ा, बल्कि गधे को भी उठाकर ले जाना पड़ा।
अब घोड़े को बहुत भारी बोझ उठाना पड़ रहा था। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह मन ही मन सोचने लगा,
“अगर मैंने पहले थोड़ा सा बोझ बाँट लिया होता, तो आज इतना भारी भार नहीं उठाना पड़ता।”
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि मदद माँगने वाले की सहायता समय पर करनी चाहिए, क्योंकि टीमवर्क से काम आसान हो जाता है और घमंड हमेशा नुकसान ही पहुँचाता है।