
बग्गू का गधा बहुत मेहनती था, लेकिन उसे लगता था कि लोग उसकी कदर नहीं करते। एक दिन उसे शेर की खाल मिल गई। उसने वह खाल ओढ़ ली और सोचा,
“अब मैं सबको डराऊँगा और गाँव का राजा बन जाऊँगा!”
गाँव में लोग उसे देखकर डर गए। गधा बहुत खुश हुआ। लेकिन खुशी के मारे वह खुद को रोक नहीं पाया और ज़ोर से रेंकने लगा—
“हीं-हांव!”
बस फिर क्या था! उसकी असली पहचान सामने आ गई। सब लोग हँसने लगे और गधा शर्मिंदा हो गया।
क्या गधा अपनी गलती से कुछ सीखेगा?
सीख:
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि अपनी असली पहचान में ही सच्ची ताकत होती है। दिखावा और झूठा घमंड कभी सफलता नहीं दिलाता।