

पापा जब बच्चे थे कक्षा 4 हिंदी की एनसीईआरटी रिमझिम-4 पुस्तक का एक रोचक पाठ है। इसमें बताया गया है कि बचपन में पापा बड़े होकर कभी चौकीदार, कभी आइसक्रीम बेचने वाले, कभी रेल की शंटिंग करने वाले, कभी वैमानिक, कभी अभिनेता, कभी चरवाहा और यहाँ तक कि कुत्ता बनने की भी कल्पना करते थे। अंत में उन्हें यह समझ आता है कि सबसे पहले एक अच्छा इंसान बनना सबसे महत्वपूर्ण है।
इस पाठ के माध्यम से बच्चे कहानी पढ़ते हैं, पात्रों के विचारों को समझते हैं और उनके बदलते सपनों के पीछे के कारणों पर विचार करते हैं। वे प्रश्नों के उत्तर देकर, अपने विचार व्यक्त करके और अपने भविष्य के सपनों पर सोचकर सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भाग लेते हैं। यह पाठ बच्चों को कल्पना करने, सही निर्णय लेने और अच्छे गुणों का महत्व समझने के लिए प्रेरित करता है।
यह पाठ बच्चों में पठन कौशल, कल्पनाशक्ति, तार्किक सोच, आत्मचिंतन, संवाद कौशल, निर्णय क्षमता और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। साथ ही यह पापा जब बच्चे थे, कक्षा 4 हिंदी, रिमझिम-4, एनसीईआरटी हिंदी पाठ, प्राथमिक हिंदी अध्ययन तथा अच्छा इंसान बनने की सीख जैसे विषयों को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हुए बच्चों की भाषा, व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों को समृद्ध बनाता है।