

ज्ञान-प्राप्ति कक्षा 8 हिंदी की एनसीईआरटी संक्षिप्त बुद्धचरित पुस्तक का तीसरा अध्याय है। इस पाठ में राजकुमार सिद्धार्थ की सत्य की खोज, कठोर तपस्या, मध्यम मार्ग की खोज तथा बुद्धत्व-प्राप्ति का अत्यंत प्रेरणादायक वर्णन किया गया है। इसमें अराड मुनि और उद्रक ऋषि के आश्रमों में ज्ञान की खोज, नैरंजना नदी के तट पर तपस्या, नंदबाला द्वारा खीर अर्पित करना, पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान, मार के प्रलोभनों और भय पर विजय तथा अंततः बुद्धत्व प्राप्त करने जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत चित्रण किया गया है।
इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी भगवान बुद्ध की ज्ञान-प्राप्ति की यात्रा, उनके आत्मबल, करुणा, धैर्य, विवेक तथा मानव जीवन के दुःखों के कारणों को समझने की उनकी दृष्टि से परिचित होते हैं। यह पाठ सिखाता है कि अति भोग और अति तप—दोनों से बचते हुए संतुलित जीवन, सही विचार, दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही यह अध्याय अज्ञान, तृष्णा और कर्मबंधन से मुक्ति का संदेश भी देता है।
यह पाठ विद्यार्थियों में ऐतिहासिक समझ, नैतिक मूल्य, आत्मचिंतन, विश्लेषणात्मक सोच, सांस्कृतिक जागरूकता, भाषा-कौशल, तार्किक चिंतन तथा सामान्य ज्ञान का विकास करता है। साथ ही यह भगवान बुद्ध के बुद्धत्व, मध्यम मार्ग, बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हुए कक्षा 8 हिंदी, एनसीईआरटी एवं विद्यालयी परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी में सहायता करता है।