

ग़ज़ल कक्षा 11 की NCERT हिंदी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-1 में संकलित दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध ग़ज़ल है। इस रचना में कवि ने समाज, राजनीति और व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया है। ग़ज़ल के शेरों के माध्यम से आम जनता की अपेक्षाओं, टूटते सपनों, सामाजिक असमानताओं और परिवर्तन की आवश्यकता को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया गया है। कवि व्यवस्था से असंतोष व्यक्त करते हुए बेहतर भविष्य की संभावना और संघर्ष की भावना को स्वर देते हैं।
यह पाठ ग़ज़ल अध्ययन, साहित्यिक विश्लेषण, वर्कशीट, फ्लैशकार्ड, क्विज़ और चिंतनात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझा जा सकता है। विद्यार्थी ग़ज़ल की संरचना, शेर, प्रतीकों, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति तथा सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों का अध्ययन करते हैं। इसका प्रारूप विचारप्रधान एवं सामाजिक चेतना से युक्त काव्य रचना का है तथा कठिनाई स्तर मध्यम से उन्नत है। यह पाठ विद्यार्थियों को समाज और व्यवस्था के प्रति सजग दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
इस अध्याय के अध्ययन से विद्यार्थियों में Critical Thinking, Analytical Thinking, Civic Literacy, Communication Skill, Understanding Skill, Observation Skill तथा Leadership Skill का विकास होता है। वे लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और परिवर्तन की आवश्यकता को समझते हैं। यह सामग्री दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल, सामाजिक चेतना, राजनीतिक व्यंग्य, व्यवस्था परिवर्तन, समकालीन हिंदी ग़ज़ल, और सामाजिक यथार्थ जैसे महत्वपूर्ण अध्ययन विषयों को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।