

बस की सैर कक्षा 8 हिंदी की एनसीईआरटी दुर्वा भाग–3 की एक रोचक कहानी है, जिसमें आठ वर्ष की बच्ची वल्ली की पहली बस यात्रा का सुंदर और भावनात्मक चित्रण किया गया है। वल्ली लंबे समय से बस में बैठकर शहर जाने का सपना देखती है। वह धैर्यपूर्वक पैसे बचाती है, यात्रा की पूरी जानकारी जुटाती है और उचित समय पर अकेले बस की सैर का अनुभव प्राप्त करती है। यात्रा के दौरान वह प्रकृति, गाँव, शहर और लोगों के व्यवहार को उत्सुकता से देखती है तथा अपने आत्मविश्वास और समझदारी का परिचय देती है।
कहानी में वल्ली के उत्साह, साहस और आत्मनिर्भरता के साथ-साथ उसके संवेदनशील हृदय को भी दर्शाया गया है। लौटते समय सड़क पर एक बछिया की मृत्यु देखकर उसका उत्साह कम हो जाता है और वह जीवन की नश्वरता तथा संवेदनाओं को गहराई से महसूस करती है। इस प्रकार कहानी बाल मन की जिज्ञासा, अनुभवों से मिलने वाली सीख और जीवन के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।
यह पाठ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, धैर्य, योजना बनाने की क्षमता, बचत की आदत, निर्णय लेने की योग्यता, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, पर्यवेक्षण कौशल, संवाद कौशल और जीवन मूल्यों का विकास करता है। साथ ही यह सिखाता है कि नए अनुभव व्यक्ति के ज्ञान और व्यक्तित्व दोनों को समृद्ध बनाते हैं।