
विद्युलता नाम की एक गर्वीली और अहंकारी महिला थी। वह हमेशा सोचती थी कि कोई भी उसे मात नहीं दे सकता। उसने घोषणा की कि जो भी उसे मात देगा, उसे बड़ा इनाम मिलेगा।
कई लोग कोशिश करते हैं, लेकिन कोई उसे मात नहीं दे पाता। फिर एक साधारण और नम्र लकड़हारा आता है। वह बड़ी चतुराई से एक साधारण-सा प्रश्न या अनुरोध करता है, जिससे विद्युलता फँस जाती है। वह समझती है कि उसकी बुद्धिमानी का दिखावा असली नहीं था।
इस घटना से विद्युलता को अहंकार और गर्व के खतरे का एहसास होता है और वह सीखती है कि विनम्रता और सोच-समझकर निर्णय लेना बहुत ज़रूरी है।
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि गर्व और अहंकार से बचना चाहिए, विनम्र रहना चाहिए, और किसी भी निर्णय से पहले सोच-समझकर काम लेना बहुत महत्वपूर्ण है।