
रामू एक ईमानदार लकड़हारा था। एक दिन लकड़ी काटते समय उसकी लोहे की कुल्हाड़ी फिसलकर नदी में गिर जाती है। रामू बहुत दुखी हो जाता है, लेकिन वह सच्चे मन से ईश्वर से प्रार्थना करता है।
तभी नदी से एक जलपरी प्रकट होती है। वह पहले सोने की कुल्हाड़ी दिखाकर पूछती है, “क्या यह तुम्हारी है?” रामू साफ़ मना कर देता है। फिर वह चाँदी की कुल्हाड़ी दिखाती है, लेकिन रामू फिर भी सच्चाई से कहता है कि वह उसकी नहीं है। अंत में जलपरी लोहे की कुल्हाड़ी दिखाती है, जिसे देखकर रामू खुशी से कहता है कि यही उसकी कुल्हाड़ी है।
रामू की ईमानदारी से प्रसन्न होकर जलपरी उसे इनाम में तीनों कुल्हाड़ियाँ दे देती है। रामू समझ जाता है कि सच्चाई और ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।
यह कहानी बच्चों को ईमानदारी, सच्चाई और नैतिक मूल्यों का महत्व सिखाती है और बताती है कि सच बोलने से बड़ा इनाम मिल सकता है।