
चंद्र देव अपनी पत्नियों में से एक, रोहिणी, को अन्य पुत्रियों से अधिक प्रेम देते हैं। इससे क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति चंद्र देव को श्राप दे देते हैं। श्राप के प्रभाव से चंद्रमा की चमक धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है। दुखी होकर चंद्र देव भगवान शिव की शरण में जाते हैं और कठोर तपस्या करते हैं। क्या भगवान शिव उन्हें क्षमा करेंगे?
यह कहानी बताती है कि चंद्रमा की कलाएँ कैसे उत्पन्न हुईं और बच्चों को पक्षपात के परिणाम तथा पश्चाताप और क्षमा की शक्ति का महत्व समझाती है।