
एक गाँव में पंडित हरिराम रहता था, जो अपनी चालाकी से लोगों को नकली पूजा-पाठ और डर दिखाकर ठगता था। गाँव वाले उसकी बातों पर आँख बंद करके भरोसा कर लेते थे। लेकिन रानी नाम की एक समझदार बकरी सब कुछ ध्यान से देखती रहती थी।
एक दिन पंडित ने फिर से झूठे अनुष्ठान का नाटक किया। रानी ने उसकी बातें सुनकर समझ लिया कि वह लोगों को बेवकूफ़ बना रहा है। उसने इशारों और हरकतों से गाँव वालों का ध्यान पंडित की गलतियों की ओर दिलाया। जब लोगों ने सच्चाई परखनी शुरू की, तो पंडित की चालाकी पकड़ में आ गई।
पंडित हरिराम की पोल खुल गई और गाँव वालों ने उसे उसकी बेईमानी के लिए सबक सिखाया। रानी की समझदारी से सबको सच्चाई का पता चल गया।
सीख:
यह कहानी बच्चों को ईमानदारी का महत्व और सोच-समझकर बातों पर विश्वास करना (आलोचनात्मक सोच) सिखाती है।