
कंठसमुद्र मंथन के दौरान एक भयानक विष निकलता है, जो पूरी सृष्टि को नष्ट करने की धमकी देता है। सभी देवता भयभीत हो जाते हैं। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव उस विष को पी लेते हैं, लेकिन उसे अपने कंठ में ही रोक लेते हैं। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो जाता है, और तभी से वे नीलकंठ कहलाते हैं।
क्या भगवान शिव का यह महान बलिदान सृष्टि की रक्षा कर पाएगा?
यह कहानी बच्चों को निस्वार्थता, त्याग, और दूसरों की रक्षा के लिए अपने कष्ट को सहने का महत्व सिखाती है।