
कृष्ण, बलराम और सुदामा अपने गुरु संदीपनि के नेतृत्व में शिक्षा प्राप्त करते हैं। कृष्ण की भक्ति और मित्रता तब और चमकती है जब वह गुरु दक्षिणा के रूप में अपने गुरु के पुत्र को वापस लाते हैं।
यह प्रेरक कथा बच्चों को गुरु के प्रति सम्मान, सच्ची मित्रता और अपने कर्तव्यों को निभाने का महत्व सिखाती है।