

पढ़क्कू की सूझ कक्षा 4 हिंदी की एनसीईआरटी रिमझिम-4 पुस्तक की एक रोचक कविता है। इसमें एक पढ़क्कू व्यक्ति और कोल्हू के बैल से जुड़ी हास्यपूर्ण घटना के माध्यम से यह बताया गया है कि केवल तर्क लगाने से ही हर समस्या का सही समाधान नहीं मिलता। यह कविता बच्चों को व्यावहारिक समझ, सूझबूझ और सही सोच के महत्व से परिचित कराती है।
इस कविता के माध्यम से बच्चे कविता पढ़ते हैं, घटनाओं का क्रम समझते हैं और पात्रों के विचारों का विश्लेषण करते हैं। वे प्रश्नों के उत्तर देकर, कहानी को अपने शब्दों में लिखकर, मुहावरों का अर्थ समझकर, नए शब्दों का प्रयोग करके तथा तर्क और व्यवहार के अंतर को पहचानते हुए सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। यह कविता बच्चों में सोचने, समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करती है।
यह कविता बच्चों में पठन कौशल, तार्किक सोच, अवलोकन क्षमता, समझने की योग्यता, शब्द भंडार, विश्लेषणात्मक क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल का विकास करती है। साथ ही यह पढ़क्कू की सूझ, कक्षा 4 हिंदी, रिमझिम-4, एनसीईआरटी हिंदी कविता, प्राथमिक हिंदी अध्ययन तथा तर्क, सूझबूझ, व्यावहारिक ज्ञान और मुहावरे जैसे विषयों को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हुए बच्चों की भाषा, विचारशक्ति और समझ को समृद्ध बनाती है।