
हरिशंकर परसाई : टार्च बेचनेवाले

टार्च बेचनेवाले कक्षा 11 की NCERT हिंदी पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग-1 में संकलित हरिशंकर परसाई का प्रसिद्ध व्यंग्य लेख है। इस रचना में लेखक ने टार्च को प्रतीक बनाकर समाज में फैले अंधविश्वास, धार्मिक पाखंड और आस्था के बाजारीकरण पर तीखा व्यंग्य किया है। लेखक दिखाते हैं कि किस प्रकार कुछ लोग लोगों के भय, असुरक्षा और अज्ञान का लाभ उठाकर अपने स्वार्थ पूरे करते हैं।
यह पाठ व्यंग्य लेख अध्ययन, प्रश्नोत्तर, वर्कशीट, फ्लैशकार्ड, क्विज़ और साहित्यिक विश्लेषण गतिविधियों के माध्यम से समझा जा सकता है। विद्यार्थी पात्रों, संवादों और प्रतीकों का विश्लेषण करते हुए व्यंग्य की शैली तथा लेखक के सामाजिक संदेश को समझते हैं। इसका प्रारूप विश्लेषणात्मक और चिंतनात्मक है तथा कठिनाई स्तर मध्यम से उन्नत है, जिससे विद्यार्थियों की तार्किक सोच और साहित्यिक समझ विकसित होती है।
इस अध्याय के अध्ययन से विद्यार्थियों में Critical Thinking, Analytical Thinking, Reading Skill, Observation Skill, Understanding Skill, Communication Skill तथा Civic Literacy का विकास होता है। वे अंधविश्वास और सामाजिक भ्रमों का विवेकपूर्ण मूल्यांकन करना सीखते हैं। यह सामग्री टार्च बेचनेवाले सारांश, हरिशंकर परसाई व्यंग्य, धार्मिक पाखंड, अंधविश्वास, और हिंदी व्यंग्य साहित्य जैसे लोकप्रिय अध्ययन विषयों को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।