तारे टिमटिमाते क्यों हैं?

तारे टिमटिमाते क्यों हैं?
बहुत समय पहले, आकाश में तारे एकदम स्थिर और शांत चमकते थे। वे बस अपनी जगह पर रहते और बिना हिले रोशनी फैलाते थे। रात का आकाश सुंदर तो था, लेकिन थोड़ा शांत और गंभीर भी।
एक रात तारों ने धरती से आती हँसी और गानों की आवाज़ सुनी। उन्हें बहुत हैरानी हुई। तारे आपस में बोले,
“धरती पर इतनी खुशी क्यों है?”
जिज्ञासा में तारे नीचे झाँकने लगे। उन्होंने देखा कि बच्चे चाँदनी रात में खेल रहे हैं, हँस रहे हैं, गा रहे हैं और खुशी से उछल-कूद कर रहे हैं। उनकी मासूम हँसी से पूरा माहौल रोशन हो रहा था।
यह देखकर तारों का दिल खुश हो गया। उन्होंने सोचा,
“अगर खुशी बाँटने से इतनी सुंदर लगती है, तो हम भी अपनी खुशी क्यों न बाँटें?”
तभी तारों ने अपनी रोशनी को हल्का-हल्का हिलाना शुरू किया। कोई तेज़ चमका, कोई धीमे-धीमे झिलमिलाया। देखते ही देखते पूरा आकाश टिमटिमाते तारों से भर गया, जैसे वे बच्चों के साथ हँस रहे हों।
उस रात से तारे टिमटिमाने लगे, ताकि धरती पर रहने वाले बच्चों को यह एहसास हो कि खुशी बाँटने से और भी बढ़ जाती है।
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि आनंद और मुस्कान बाँटने से दुनिया और भी सुंदर बन जाती है, और छोटी-छोटी खुशियाँ भी जादू कर सकती हैं।









