रंग-बिरंगे नाखून

इस रोमांचक कहानी में एक चालाक पक्षी पकड़ने वाला राजा कृष्णदेवराय को एक रंग-बिरखा पक्षी बेचता है, जो देखने में गाता और नाचता हुआ लगता है। राजा उस अनोखे पक्षी से बहुत प्रभावित हो जाते हैं और उसे खरीद लेते हैं।
लेकिन दरबार के बुद्धिमान मंत्री तेनाली रामन को इस पर शक हो जाता है। वे ध्यान से पक्षी को देखते हैं और उसकी चाल समझ जाते हैं। सच्चाई सामने लाने के लिए तेनाली रामन पक्षी पर पानी डाल देते हैं। पानी पड़ते ही उसका रंग उतर जाता है और सबको पता चल जाता है कि वह कोई खास पक्षी नहीं, बल्कि धोखे से सजाया गया साधारण पक्षी है।
इस तरह तेनाली रामन समय रहते पक्षी पकड़ने वाले के झूठ को उजागर कर देते हैं और राजा को ठगे जाने से बचा लेते हैं।
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि बाहरी दिखावे से प्रभावित नहीं होना चाहिए, सच्चाई को परखना ज़रूरी है, और ईमानदारी ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।