
एक सुंदर झील के किनारे एक सफेद, चमकदार हंस रहता था। उसकी चाल, उसके पंख और उसका शांत स्वभाव सबको बहुत अच्छे लगते थे। उसी झील के पास एक काला कौआ भी रहता था। वह हंस को देखकर उदास हो जाता और सोचता,
“काश! मैं भी हंस की तरह सुंदर होता। मेरे पंख तो बिल्कुल साधारण हैं।”
एक दिन कौआ हंस के पास गया और बोला,
“तुम कितने सुंदर हो! और मैं… मुझे कोई पसंद ही नहीं करता।”
हंस मुस्कराया और प्यार से बोला,
“मित्र, सुंदरता केवल रंग या पंखों में नहीं होती। तुम बहुत समझदार हो, ऊँचा उड़ते हो और हर जगह खुद को ढाल लेते हो। यह भी एक खास गुण है।”
हंस ने आगे कहा,
“हर पक्षी को भगवान ने अलग-अलग गुणों के साथ बनाया है। अगर सभी एक जैसे होते, तो दुनिया कितनी उबाऊ होती!”
यह सुनकर कौआ सोच में पड़ गया। उसे समझ आ गया कि उसकी अपनी पहचान और खूबियाँ भी बहुत खास हैं। अब वह अपने पंखों से शर्मिंदा नहीं था, बल्कि खुद पर गर्व करने लगा।
सीख:
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि खुद को स्वीकार करना और अपनी अलग पहचान पर गर्व करना बहुत ज़रूरी है। हर कोई अपने तरीके से खास होता है।