
राजकुमारी सुखार्या गलती से साधु चावन की ध्यान मुद्रा में आँखें घायल कर देती है। अपराधबोध से भरकर वह उनकी देखभाल में खुद को समर्पित कर देती है। क्या उसकी निस्वार्थ भावना उस नुकसान को ठीक कर पाएगी जो उसने किया था?
यह मार्मिक कहानी बच्चों को सहानुभूति, जिम्मेदारी और गलतियाँ सुधारने के महत्व की सीख देती है।