
मोहन और सोहन जंगल में अपनी साहसिक यात्रा का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक उन्हें एक भारी भालू दिखाई दिया।
डर के क्षण में, मोहन ने सोहन को छोड़कर खुद को बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ना तय किया।
सोहन ने तेज़ सोच से खेला—वह मृतकों की तरह पड़ा और भालू को भ्रमित किया।
भालू को लगा कि सोहन ज़िंदा नहीं है, और वह चला गया।
सीख:
इस कहानी से बच्चों को पता चलता है कि सच्चा मित्र वही है जो मुश्किल समय में भी साथ खड़ा रहे।
धैर्य और समझदारी संकट में भी मदद कर सकती है।